Sunday, November 18, 2007

"अनबूझ प्यास"


ना जाने कैसी है
सदियों से
अनबूझ
ये प्यास तुम्हारी,
जड़ - चेतन
जीवित स्पंदन से
सदा आलोड़ित
धरा हमारी,
फिर भी
अनंत व्योम में
किस मारीचिका की
तलाश है तुम्हारी .
हैरान है
इस बौद्धिक खेल से
अब तक मानवता सारी,

पर
चांद-तारों पर टिकी है
अब नज़र तुमहारी
उनके चैन छिनने की
अब
है बारी.

14 comments:

रंजू said...

अनंत व्योम में
किस मारीचिका की
तलाश है तुम्हारी .

वाह बहुत सुंदर लिखा है आपने डॉ गिरी ...इसको पढ़ना बहुत सुखद लगा !!

विवेक बाजपेई said...

पर
चांद-तारों पर टिकी है
अब नज़र तुमहारी
उनके चैन छिनने की
अब है बारी.
बहुत बढ़िया बात कही हैं आपने जनाब ...
एक डॉक्टर को इतने सवेदनशील विषय पर लिखता देखकर अच्छा लगा .. वैसे मैंने एक ब्लॉग बनाया है jindagilive.ब्लागस्पाट.कॉम .. पेशे से पत्रकार हू और न्यूज़ चैनल मैं रिपोर्टर हूँ ,,, लिखते रह्ये इसे ही कठिन बिषय पर ... शुभ्काम्नाऊ सहित .. धन्यबाद

विवेक बाजपेई said...

पर
चांद-तारों पर टिकी है
अब नज़र तुमहारी
उनके चैन छिनने की
अब है बारी.
बहुत बढ़िया बात कही हैं आपने जनाब ...
एक डॉक्टर को इतने सवेदनशील विषय पर लिखता देखकर अच्छा लगा .. वैसे मैंने एक ब्लॉग बनाया है jindagilive.ब्लागस्पाट.कॉम .. पेशे से पत्रकार हू और न्यूज़ चैनल मैं रिपोर्टर हूँ ,,, लिखते रह्ये इसे ही कठिन बिषय पर ... शुभ्काम्नाऊ सहित .. धन्यबाद

divya said...

bahut hi khoobsurat rachna hai doc...sambedansheel.....aap ke sawaal gehre hai...
bahut achchi lagi aapki kavita
[:)]
divya

swapna said...

अनंत व्योम में
किस मारीचिका की
तलाश है तुम्हारी .

ye lines bahut man ko bha gayee.

surabhi said...

chad taro par diki hai
ab najar tmari
unkichen chnane ki
ab hai bari..
bahu sundar likh hai
Dr.shab bahut badhiya likha ai
ek naee umidh ka srjan...
Regard

सुनीता said...

किस मारीचिका की
तलाश है तुम्हारी .
हैरान है
इस बौद्धिक खेल से
अब तक मानवता सारी,

पर
चांद-तारों पर टिकी है
अब नज़र तुम्हारी
उनके चैन छिनने की
अब है बारी.

वाह! क्या ख़ूब!...संवेदनशील रचना है...
पंक्तियाँ मन को छू गए...
सुनीता

bahadur said...

nice.............it seems u r vry senstive guy.......rite naa?

pragati "pragsavee" said...

bahut kam shabdon mein aapne bahut kuch likh diya hai..
ati sundar!

Keerti vaidya said...

apko padhna hamesha he acha lagta hai.....jahan tak apki ise rachna ke baat hai.....padh kar mein kho gayi.....

abha said...

bahut hi sunder likha Ram tumne...
yunhi likhte raho..
god bless..
abha

meeta said...

चांद-तारों पर टिकी है
अब नज़र तुमहारी
उनके चैन छिनने की
अब है बारी.
:
beautiful lines......aur aapki hindi bemisal hai...

I M POWER vartika ..... burning invisible flame said...

well mam

its a nice poem
but would like to say .........
hindi mein alankar ka prayog khasa mahtav rakhta hai
aapki ye kavita isse paripoorn hai.
par kavita ek aise rachna hoti hai jo na sirf humare shabdo balki humare ehsaas ka milan hoti hai

i think ....apko ispe thoda aur wrk karna chaiye ...taaki ye sirf shabd he na reh jaayein inme ehssaas bhi utarna chaiye .....

waise manna padega ........is alinkarit kavita ne dil ko kahi na kahin choo liya

regards

VARTIKA

ritusaroha said...

चांद-तारों पर टिकी है
अब नज़र तुमहारी
उनके चैन छिनने की
अब है बारी.
kamal likha hai....aapne....kash itna behtreen main likh pati.....

shukriya