Wednesday, March 12, 2008

"पकती रही एक रोशनी की आस "

अंतहीन थी निराशा
घुप्प अँधेरे का जाल,
नीरवता से कहता रहा
दिल का हाल
जुगनू पकड़ता रहा
सारी रात.

व्यथा को सुलगाते
आँखों को बहलाते ,
अगले ही पल
वो खो जाते .

उनकी उष्मा बटोरती
ओस से गीली
मेरी साँस ,
सुबह तक रहा
उन जुगनुओं का साथ ,
पकती रही
एक रोशनी की आस .

35 comments:

vandana said...
This comment has been removed by the author.
vandana said...

बहुत बढ़िया डॉ. साहब !!...इस एक रोशनी कि आस का तो सभी को सहारा होता है.

manas said...

UR POEM HAS FLOW BUT IN SOME PARTS IT IS LACKING EMOTIONS
BEST OF LUCK

surabhi said...

नीरवता से कहता रहा
दिल का हाल
जुगनू पकड़ता रहा
सारी रात.
roshani ki aas bahut sunadar kavita hai
regards

Teri Meri Baatein said...

Itni badhiya kavita hai ki mere paas shabd nahi hain...bahot hi touching hai, bahot hi sundar...andar tak chhu jane wali...

गौरव सोलंकी said...

जब तक आस है
कहाँ कौन उदास है?
:)

vinodbissa said...

गिरी जी ''पकती रही एक रोशनी की आस'' बेहद खूब सूरत कविता है ...... और ''जुगनू पकड़ता रहा सारी रात''.........शानदार पंक्ति है.... वास्तव में मैं भी कुछ देर तक कल्पना की दुनिया मैं सैर करता रहा ........... बेहद अच्छी रचना के लिए आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं...........बधाई ...

words to feel said...

''सुबह तक रहा
उन जुगनुओं का साथ ,
पकती रही
एक रोशनी की आस .''

no matter what we do and try..hope never leaves us...or we never leave hope..

nice doc..too good..

yogesh samdarshi said...

bahut achhi kavita hain janab...
badahai

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

पकती रही एक रोशनी की आस "

"व्यथा को सुलगाते
आँखों को बहलाते ,
अगले ही पल
वो खो जाते ."
वाक़ई....नाज़ुक ख़याल है जी
आपने मधुमास को मदिर बना दिया बधाइयां

"Nira" said...

dr. sahab
aapki poem bahut pasand aayi bahut ghahrayi aor dilko choo jaye aisi likhi hai.

kesar said...

badhai ho doctor saheb ! :-) apne badi khoobsurati se man ki aas ko kaagaz per utara hai jugnu wala prateek na sirf sateek hai balki pyara bhi hai mujhey apki kavita behad achhi lagi .
namrata

ek insan said...

bahut achee lagee aap kee kavita shubh kamanayen hain

Anil masoomshayer

chaya said...

nice..

Neelima G said...

A very nice poem, showing the state of ur heart in the hopes of gud things. And i have learned from a frnd few days back only tht HOPE is sumthing which can make a dying person survive.

A very good depiction of sadness and hopes. I liked it a lot. I HOPE I CAN WRITE SUMTHING LIKE THT IN FUTURE...

कुमार आशीष said...

उनकी उष्मा बटोरती
ओस से गीली
मेरी साँस
..गहरी भावाभिव्‍यंजना का वाहक बनी हैं..ये पंक्तियां..

Alpana Verma said...

ek imaandar kavita----sundar !

रंजू said...

व्यथा को सुलगाते
आँखों को बहलाते ,
अगले ही पल
वो खो जाते .

बहुत सुंदर लिखी है आपने

रश्मि प्रभा said...

अंतहीन निराशा में एक रौशनी की आस
बन जाती है जीने का सबब
और ज़िन्दगी के मायने बदल जाती है.......

बहुत सुन्दर

Sant Sharma said...

खूबसूरती से लिखी गयी एक सकारात्मक कविता, बधाई |

archit said...

really good..!

it touches my emotion..
jugnuon ke roshni ...acchi thi..

par lagta hai ab bhi kuch kahi chuta hai...vyaktigat zindgai me..

neway awesome//!

maya said...

good one
keep it up

Keerti Vaidya said...

bhut dino baad apki nayi kavita padhneyko mili ......


sunder abhivaykti...ek nayi roshni ke aas ka panpna...

ritusaroha said...

नीरवता से कहता रहा
दिल का हाल
जुगनू पकड़ता रहा
सारी रात.


bahut acchi panktiyan lagi dr shahb.........bahut acche,.... likhte rahiye.......yun hi.......

Gita pandit said...

उनकी उष्मा बटोरती
ओस से गीली
मेरी साँस ,


एक रोशनी की आस .


बहुत सुंदर ....

गिरी जी !
शुभकामनाएं....

बधाई ..

आलोक शंकर said...

achche bimb hain,
sundar kavita.

ATUL KUMAR said...

vyatha ko sulgate
ankhon ko bahlate
agle hi pal
wo kho kho jaate

....bahut khoob Dr Giri.Kavita ki jaan hain ye panktiyan aisa mera vyaktigat khyal hai.Keep going.
Atul Garg

abha said...

bahut sunder ....yunhi likhte raho....i just loved reading it..

DR.ANURAG ARYA said...

bahut khoob.....

Akshaya-mann said...

bahut sundar rachna hai

Advocate Rashmi saurana said...

aapki ye rachana bhut hi badhiya hai. sach me bhut sundar.

Rani Mishra said...

सुबह तक रहा
उन जुगनुओं का साथ ,
पकती रही
एक रोशनी की आस .
इन पंक्तियों में रचनाकार के भावः साफ़ झलक रहे है,
सुबह तक अपनी कल्पनाओ का साथ रहा, एक रौशनी की उम्मीद को ले कर
पर उम्मीद में भी एक निराशा होती है, क्यूंकि मन ये जनता है कि जो आस है वो पूरी नहीं होगी,
पर फिर भी न जाने कोन सी आस...............
कल्पनाओ के पूरे होने की आस.................
बहुत ही सुंदर, भावपूर्ण..........

Rani Mishra said...

सुबह तक रहा
उन जुगनुओं का साथ ,
पकती रही
एक रोशनी की आस .
इन पंक्तियों में रचनाकार के भावः साफ़ झलक रहे है,
सुबह तक अपनी कल्पनाओ का साथ रहा, एक रौशनी की उम्मीद को ले कर
पर उम्मीद में भी एक निराशा होती है, क्यूंकि मन ये जनता है कि जो आस है वो पूरी नहीं होगी,
पर फिर भी न जाने कोन सी आस...............
कल्पनाओ के पूरे होने की आस.................
बहुत ही सुंदर, भावपूर्ण..........

maya said...

aathi sundar.....
keep it up

mystic smile 'Keya' said...

it's a beautiful piece of art...i loved it...i found it quite near my heart...as if i wasn't reading but things were happening...in this way....